भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Awadhi Sahitya-Kosh (Hindi-Hindi) (LU)

Lucknow University

हरिपाल सिंह

सुहिलामऊ, तहसील संडीला जनपद हरदोई निवासी सिंह साहब आधुनिक अवधी साहित्यकार थे। साथ-साथ ब्रज एवं खड़ी बोली का भी प्रयोग किया। इनका जन्म १८७९ को हुआ था एवं मृत्यु १९२३ ई. को। इन्होंने श्री दुर्गाविजय नामक अवधी ग्रंथ का प्रणयन किया है। जिसका प्रकाशन नवल किशोर प्रेस, लखनऊ से सन् १८९८ में हुआ। इनकी अन्य रचनाएँ हैं- विद्या के लाभ, राजा पुरूरवा और उर्वशी की कथा, सोम्बारी का मेला, ललितादेवी का मेला आदि लगभग एक दर्जन रचनाएँ हैं।

हरि प्रसाद

ये भारतेन्दु युगीन अवधी साहित्यकार हैं।

हरिप्रसाद मिश्र

फैजाबाद निवासी मिश्र जी एक अल्पख्यात अवधी कवि हैं।

हरिबख्श सिंह ‘हृदयेश’

इनका जन्म- १९५२ में एवं जन्म स्थान पूरे धानूमुदाई का बाग, रायबरेली। इन्होंने प्रचुर मात्रा में अवधी काव्य का सृजन किया है।

हरिभक्त सिंह पँवार

पँवार जी का जन्म १ मई सन् १९४३ ई. को ग्राम अटोडर रानीबाग में हुआ था। ठेठ अवधी में रचित इनके काव्य में ग्रामीण अंचल का सौन्दर्य, धरती का सोंधापन एवं नैसर्गिक वातावरण का प्रतिबिम्बन हुआ है। खेत-खलिहान, किसान, गाँव-गिराउँ, फूल-फल आदि इनके लोकगीतों के विषय हैं।

हरिराय

प्राप्त प्रमाण के अनुसार इनकी रचना है- ‘जानकी रामचरित नाटक’ (अवधी)। इनका रचनाकाल- सं. १८५० कहा गया है। उल्लिखित कृति और अन्यान्य विवरण अभी गर्भस्थ है।

डॉ. हरिशंकर मिश्र

इनका जन्म २० फरवरी सन् १९५० को ग्राम ऊनौ पो. सरसवाँ, जनपद इलाहाबाद के पं. श्री राजनारायण मिश्र जी के यहाँ हुआ था। डॉ. मिश्र सम्प्रति लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रध्यापक हैं। इन्होंने अवधी पर बहुत-सा कार्य किया है, जैसे- श्रीमद्‌भागवत और तुलसी साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन (प्रका.),अवधी गद्य लेखन तथा समीक्षा, मध्ययुगीन एवं आधुनिक कविता समीक्षा।

हरिशंकर शर्मा

पैरोडी हास्य लेखक (अवधी) भाषा में।

हरिश्चन्द्र पाण्डेय ‘सरल’

इनका जन्म सन् १९३२ में जनपद फैजाबाद के पहितीपुर कवलापुर ग्राम में हुआ। ये बहुत संवेदनशील अवधी रचनाकार हैं। इनकी रचनाओं में स्वर का जादू निवास करता है। इनकी रचनाओं में सामाजिक विसंगतियाँ, कारुणिक प्रसंग, ग्राम्य जीवन की मधुर ललित तथा करुणा कलित सम्पुष्ट हुआ है।

हाफिज महमूद खाँ

अपरहटी, रीवाँ के निवासी खाँ साहब अवधी भाषा के अनन्य भक्त हैं। इन्होंने अवधी को केन्द्र बिन्दु बुनाकर अपनी रचना धर्मिता प्रस्तुत की है।

हिन्दी भाषा और साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास

यह डॉ. ज्ञानशंकर पाण्डेय कृत समीक्षा ग्रन्थ है। इसमें व्याकरण के साथ-साथ अवधी साहित्यकारों का विशद परिचय दिया गया है। इसका प्रणयन सन् १९८९ में हुआ।

हिन्दी विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय

इस विभाग द्वारा संपादित अवधीग्रंथों, शोध प्रबन्धों, पत्र पत्रिकाओं, पाठ्यक्रमों और अवधी साहित्य हेतु किये गये प्रयासों की सर्वत्र सराहना की गयी है। ‘अवधी परिषद’ की स्थापना करके विभाग ने अवधी के मानकीकरण का कार्य किया है। अवधी पर यहाँ से दो दर्जन डी.लिट. एवं लगभग सत्‍तर पी-एच.डी. शोध कार्य सम्पन्न हो चुके हैं और दर्जनों विषयों पर शोध कार्य चल रहा है।

हिन्दुस्तानी ग्रामर

यह गिलक्राइष्ट कृत हिन्दी की गद्य कृति है। इसमें अरबी-फारसी के प्रभाव के साथ-साथ अवधी भाषा का भी पर्याप्त प्रभाव परिलक्षित होता है। इसका सृजन सन् १७९६ ई. में हुआ था।

हुसैन अली

ये सूफी कवि थे। इन्होंने सन् १७३८ में ‘पुहुपावती’ नामक रचना का प्रणयन किया। इसी रचना में इनके उपनाम सदानंद का उल्लेख मिलता है। इनके काव्य गुरू केशवलाल थे। इनकी भाषा ब्रज मिश्रित अवधी है। यों अवधी का विनियोग अपेक्षाकृत अधिक है।

हेमचन्द्र

इनका जन्म सं. ११४५ वि. में हुआ था तथा इनकी मृत्यु सं. १२२९ वि. में। हेमचन्द्र की रचनाएँ- प्राकृत पैंगलम् प्रबंध चिंतामणि, प्रबंध कोश, पुरातन प्रबंध संग्रह तथा व्याकरण है, जिनमें अवधी भाषा के बीज देखे जा सकते हैं।

होरी

होलिकोत्सव के अधिकांश लोकगीत अवध क्षेत्र में पुरुषों द्वारा गाये जाते हैं, केवल यह होरी गीत स्त्रियों द्वारा गेय है। इसमें वे अपना उल्लास व्यक्त करती हैं।

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