भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Awadhi Sahitya-Kosh (Hindi-Hindi) (LU)

Lucknow University

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अंधियार पाखु

यह डॉ. सुशील सिद्धार्थ कृत अवधी का अप्रकाशित उपन्यास है। इसमें उच्च शिक्षा से सम्बद्ध लोगों को केन्द्र में रखकर उनके अत्याचारों को चित्रित किया गया है।

अखरावट

यह जायसी कृत अवधी रचना है। इस कृति में वर्णमाला के एक-एक अक्षर के आधार पर ईश्वर, जीव, जगत, सृष्टि आदि आध्यात्मिक भावों का विवेचन किया गया है।

अगवानी

अवधी का एक स्वागत गीत, जो बारातियों के सत्कार के लिये स्त्रियों द्वारा गाया जाता है।

अच्छेलाल शुक्ल ’रसिक’

रसिक जी ने अवधी साहित्य के अभिवर्द्धन हेतु कन्हैया-चरित्र, द्रोपदी-पुकार आदि के साथ ही ढेर सारी रचनाओं का सृजन किया है। शेष विवरण अनुपलब्ध है।

अजदत्त

ये द्विवेदी युग के अल्पख्यात अवधी रचनाकार हैं। काव्यधारा को प्रवहमान रखने में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।

अजमल सुल्तानपुरी

ये सुल्तानपुर के निवासी एवं अल्पख्यात अवधी कवि हैं।

अज्ञात

यह नाम है अथवा विशेषण, स्पष्ट नहीं। ‘विनोद’ के अनुसार ’कामरूप’ नामक अवधी काव्यकृति अज्ञात कवि की लिखी हुई है।

अनंतदास साधु

इन्होंने सं. १६४५ के लगभग कुछ अवधी कविताएँ लिखी थीं। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- नामदेव आदि की परची संग्रह, पीपा जी की परची, समन सेउजी की परची आदि आठ अवधी ग्रन्थ।

अनन्य

इनका जन्मकाल सं. १७१० है। इनकी प्राप्त कृति ‘सिंदोरा’ का रचना-काल सं. १७३५ (लगभग) कहा गया है। यह कृति अवधी की श्रेष्ठ काव्यकृति मानी गई है। शेष विवरण अन्वेषणाधीन है।

अनुरागी

ये हरदोई के निवासी हैं। इनकी काव्यकृति ‘मीनाबाजार’ (खण्डकाव्य) अवधी काव्य में गण्यमान है।

अनूप शर्मा

ये लखनऊ के निवासी एवं अवधी कविताएँ करने में सिद्धहस्त कवि हैं। इनकी कविताएँ प्रायः पत्र-पत्रिकाओं में छपा करती हैं।

अनूप श्रीवास्तव

लखनऊ नगर के निवासी श्रीवास्तव जी अपनी कविताओं के लिए बहुत मशहूर हैं। इन्होंने अवधी को अपनी काव्य भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की है।

अब्दुर्रशीद खाँ ‘रशीद’

रायबरेली निवासी रशीद जी उच्चस्तर के साहित्यसेवी रहे हैं। इनकी साहित्य-सर्जना अधिकांश अवधी भाषा में प्रस्फुटित हुई है। इनका साहित्यिक स्थान अग्रगण्य है। इनका जन्म एवं मृत्यु वर्ष है क्रमशः १९०० एवं १९८० ।

अब्दुल कुद्दूस गंगोही (शेख)

इनका जन्म रुदौली (बाराबंकी) में सं. १५१३ वि. में हुआ था। कालांतर में ये गंगोह (सहारनपुर) में बस गए, जिसके कारण इनके नाम के पीछे गंगोही शब्द लगने लगा। इनकी मृत्यु सं. १५९४ वि. में हुई। इनका उपनाम ‘अलखदास’ भी मिलता है। इन्होंने ‘चांदायन’ का फारसी अनुवाद किया था। इनके पिता का नाम इस्माइल था।

अमरजीत

ये जहाँगीरगंज, फैजाबाद के निवासी एवं अवधी साहित्यकार हैं।

अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’

ये पूरे रूप, अमावाँ, जिला रायबरेली के निवासी एवं सुविख्यात अवधी कवि रहे हैं। इनका जन्म १९२९ तथा अवसान सन् १९७८, में हुआ।

अमीर अली वारसी

ये कबीर पंथी संत रहे हैं। इनका जन्म सन् १८९० ई. में ग्राम गंगाचौली, जनपद बाराबंकी में हुआ था। इन्होंने अवधी साहित्य में अविस्मरणीय योगदान किया है। इनका अवधी ग्रंथ है- “ज्ञान संग्रह” जो दो खण्डों में प्रकाशित हुआ है। प्रथम सन् १९३४ में तथा दूसरा सन् १९४४ में।

अमीर खुसरो

मध्य एशिया की लाचन जाति के तुर्क सैफुद्दीन के पुत्र अमीर खुसरो का जन्म सन् १२५४ ई. (६५२ हि.) में एटा (उ.प्र.) के पटियाली नामक कस्बे में हुआ था। इनकी माँ बलवन के युद्ध मंत्री इमादुतुल मुल्क की लड़की, एक भारतीय मुसलमान महिला थीं। इनकी प्रतिभा बाल्यावस्था से ही काव्योन्मुख थी। इनमें उच्च कल्पनाशीलता के साथ-साथ सामाजिक जीवन के उपयुक्त कूटनीतिक व्यवहार-कुशलता की दक्षता मौजूद थी। खुसरों ने अपना सम्पूर्ण जीवन राज्याश्रय में बिताया। इन्होंने गुलाम, खिलजी और तुगलक तीन अफगान राजवंशों तथा ११ सुल्तानों का उत्थान-पतन देखा। जलालुद्दीन खिलजी ने खुसरों को अमीर की उपाधि प्रदान की। ये मुख्यरूप से फारसी के कवि थे किन्तु इन्होंने हिन्दी को भी अपनी प्रतिभा समर्पित कर हिन्दी साहित्य में प्रमुख स्थान प्राप्त किया। इनकी हिन्दी रचनाओं में मुकरी, पहेली आदि रूपों में जो काव्य-सृजन हुआ उसमें मुख्यतः अवधी के दर्शन होते हैं। अपने गुरू शेख निजामुद्दीन की मृत्यु को ये सहन नहीं कर सके अन्ततः ६ माह बाद सन् १३२५ ई. मे इन्होंने अपनी इहलीला समाप्त कर दी।

अमृतवाणी

यह दुर्गादास जी कृत अवधी ग्रंथ है। इसका प्रकाशन सन् १९८७ में लखनऊ से हुआ। इसके संपादक एवं प्रकाशक श्री रामनारायण चौधरी आई.ए.एस. (सेवानिवृत्त) हैं।

अम्बिका प्रसाद

द्विवेदी युग में अवधी काव्यधारा को जीवनदान देने वालों में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इनका साहित्य अभी अप्रकाशित है।
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